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डॉअमृता शुक्ला

Tragedy Others

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डॉअमृता शुक्ला

Tragedy Others

प्यासा कौवा

प्यासा कौवा

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एक बार मैं आकाश में ऊंची उड़ान भर रहा था ।

जंगल ,पहाड़ों ,बस्ती के ऊपर से गुज़र रहा था।

गर्मी का मौसम था ,सो मुझे प्यास लग आयी थी।

जल पाने के लिए इधर-उधर नज़र दौड़ायी थी।

कहीं कोई भी पानी का स्रोत नहीं दिखाई पड़ा ।

तभी घर के पास मिट्टी का मिल गया एक घड़ा।

पर वो तो खाली था, बस नीचे तल में था पानी।

क्या उपाय करें जिससे दूर हो जाए ये परेशानी

तब मटके में कंकड़ डालने की सुध आयी थी। 

धीरे से पानी ऊपर आया, मैंने प्यास बुझायी थी।

आज ऐसे हालात है मटका, कंकड़, न पानी है, 

नल की टपकती बूंदों से ही प्यास बुझानी है। 



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