प्यार .. शायरी
प्यार .. शायरी
कभी तो शाम ढले अपनी आँखों में सँवर जाने दे,
मेरे सनम तेरी चाहत में मुझे बिखर जाने दे...
तुझे तकता रहूं फ़क़त और कोई काम ना हो,
इश्क़ में तेरे मुझे हर हद से गुज़र जाने दे..!!!!
रंजिशों से जुदा रास्ते हो गए
और फिर दरमियाँ फ़ासले हो गए
हम जहाँ से चले आ गए फिर वहीं
रक्स-ए हालात से दायरे हो गए
शीरीं पैराए में जब भी की गुफ्तगू
हम तो गिरवीदा बस आपके हो गए
गांव जलता रहा वो तमाशाई थे
उनके शहरों में भी हादसे हो गए
अपने हो कर भी थे जो कभी अजनबी
हाजतों के सबब वास्ते हो गए।

