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Nand Kumar

Tragedy

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Nand Kumar

Tragedy

प्यार किससे करूं कोई जँचता नही

प्यार किससे करूं कोई जँचता नही

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प्यार किससे करूं कोई जचता नहीं ,

बोझ जीवन लगे वक्त कटता नहीं।

कैसे हमदम जगत में बताऊं उसे ,

साथ चलने का हो जिसमे दम ही नहीं ।

दुख पडे जो कभी जिंदगी में अगर ,

साथ जो छोड़ दे हमसफर वह नहीं ।

वो सनम है भला कैसा किस काम का ,

आंख गम में मेरे जिसकी हो नम नहीं।

जिसको पाकर भी सन्तुष्ट हो ना सके ,

ज्ञानी जन उसको कहते है दिलवर नहीं।

छोडकर छल कपट त्याग कर स्वार्थ को ,

प्यार करता नजर कोई आता नहीं।

इस धरा को बनाकर के श्मशान हम ,

कह रहे है कि सुख हमको मिलता नहीं।

कर्म जैसे करो बैसा पाओगे फल ,

नीम के पेड पर आम फलते नहीं।

वासना पंक में डूबे आकण्ठ हम ,

प्रेम का है नया अर्थ हमने किया।

प्रेम की ही है चर्चाएं अब हर तरफ,

प्रेम कर लोग रोते हैं कम क्यों नहीं?



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