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प्यार की वो डोर

प्यार की वो डोर

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चलो अब प्यार की वो डोरी,

खोल ही देते हैं,

जिसमें होने का वजूद नहीं।


चलो अब रिश्ते की वो,

माला तोड़ ही देते हैं,

जिसमें कुछ खोने का डर नहीं।


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