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Dheeraj Sarda

Abstract Drama Others


5.0  

Dheeraj Sarda

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दुआ में खुदा से क्या माँगू

दुआ में खुदा से क्या माँगू

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अगर हर रज़ा हो पूरी मेरी,

जो भी मैं दुआ मे मांगू,

तो जद्दोजहद इस बात की खुद से,

की दुआ मे खुदा से क्या मांगू |


एक ग़रीब के घर मे भी प्यार देखा,

और अमीरो की ज़रूरतो का अंबार देखा |

एक निवाले को सब मे बँटता हुआ देखा,

तो कुछ टुकड़ो के लिये गला कटता हुआ देखा |

तो उन कटे हुए गलो की जान मांगू,

या जो अंदर मर चुका है, वो इंसान मांगू |

जद्दोजहद इसी बात की है खुद से,

की दुआ मे खुदा से क्या मांगू ||


किसी पराए की मौत को नज़रअंदाज करते देखा,

लेकिन पराए धन के लिए तेरा वो अंदाज भी देखा |

थक कर किसी को पत्थर पर भी सुकून से सोते देखा,

तो नरम बिस्तर पर भी रात भर करवट बदलते देखा |

तो उस पत्थर पे सोये इंसान के लिए कोई महल मांगू,

या महल मे सोये इंसान के लिए थोड़ा सुकून मांगू |

जद्दोजहद इसी बात की है खुद से,

की दुआ मे खुदा से क्या मांगू ||


मैने तुम सब का भाईचारा भी देखा,

लेकिन अयोध्या मे राम ओर अल्लाह का बँटवारा भी देखा |

जाने अनजाने मे तुम्हारी वो नादानी भी देखी,

हिन्दी को हिंदू और उर्दू को मुसलमान होते देखा |

तो उर्दू बोलने के लिये किसी मुसलमान के घर नया जन्म मांगू,

या इन उर्दू के लफ़्ज़ों की जगह हिन्दी के शब्द मांगू |

ये छोड़िए जनाब, अब जद्दोजहद इस बात की है खुद से,

की मैं खुदा से मांगू या भगवान से मांगू ||


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