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Dheeraj Sarda

Abstract Drama Romance


4.7  

Dheeraj Sarda

Abstract Drama Romance


वो सफर ही छोड़ आये

वो सफर ही छोड़ आये

1 min 302 1 min 302

हमदर्द तो हमसे छूट गया, 

हम वो दर्द फिर भी ले आये |

कभी वो हमसफ़र हमारी मंजिल थी, 

आज हम वो सफर ही छोड़ आये | |


गलती नहीं थी किसी की ये, 

बस समय की बेपरवाही थी |

ख्वाबों के रास्तो में, कुछ तुम्हारी, 

कुछ हमारी लापरवाही थी | |

साथ चलने के उन वादों में, 

साथ निभाना भूल आये |

तब वो हमारा साहिल  था, 

आज हम वो समंदर ही छोड़ आये | | 1 | |


अब दिल भारी है,

और गलियां है वीरानी | 

बस याद आती है,

कैसी बरखा थी सुहानी | | 

पर बेवफाई का दर्द इतना,

की कोई प्यार भी भूल जाये | 

अब और जिल्लत नहीं क़बूल,

अच्छा हुआ जो वो महफ़िल ही छोड़ आये | | 2 | | 


  • Dheeraj Sarda



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