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Dheeraj Sarda

Abstract


5.0  

Dheeraj Sarda

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बिखरते रिश्ते

बिखरते रिश्ते

1 min 300 1 min 300

खिलती खुशियां, पड़ती दरारे, थोड़ी हंसी, थोड़ी घुटन सी है |

ये बात दुनियाँ की नहीं, ये बात बिखरते रिश्तों की है ||


वो पैदा किया तो खून का रिश्ता,

निभाना पड़ा तो लगे बोझ ये रिश्ता |

दोस्ती में बनता मकरंद सा रिश्ता,

भीतर पनपता किसी से द्वन्द का रिश्ता || १ ||


उसको देख धड़कते दिल का रिश्ता,

फिर उसी दिल के कातिल से रिश्ता |

अनकहा किसी से, भरोसे का रिश्ता,

अपनों से मिले धोखे का रिश्ता || २ ||


खुली आँखे, टूटे सपने, कुछ बहाने, कुछ डर भी है |

ये बात दुनियाँ की नहीं, ये बात बिखरते रिश्तों की है ||



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