प्यार की नदिया हूं मैं।
प्यार की नदिया हूं मैं।
प्यार मुझसे यार तुमने ही किया मैंने तो नहीं।
तो तुम्हारा प्यार में प्रतिशोध लेना क्या सही।
मैं तेरी चाहत भले हूं पर मेरी चाहत और है।
मेरे दिल में सिर्फ उसकी भावना का जोर है।
मेरा दिल उसका दीवाना मैं उसी की हो रही।
तो तुम्हारा प्यार में प्रतिशोध लेना क्या सही।
चलो यह भी मान लूं कि मैं तुम्हारी जान हूं
मैं न उसकी हो सकी जिसके लिए परेशान हूं।
प्यार की नदिया हूं मैं पर प्यार की प्यासी रही
तो तुम्हारा प्यार में प्रतिशोध लेना क्या सही।
अभी मौका है तुम्हें कोई और साथी खोज लो।
मोल दे जो प्यार का अपनी वफा उसे सौंप दो।
मैं तुम्हारी निगाह में एक बेवफा हो कर रही।
तो तुम्हारा प्यार में प्रतिशोध लेना क्या सही।।

