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Sheela Sharma

Romance


4  

Sheela Sharma

Romance


हिलोरे प्रीति की

हिलोरे प्रीति की

1 min 275 1 min 275

आज मन क्यों उल्लास है 

जमीं की आसमां से हुई बात है

 फिजाओं ने छेड़ी राग

 हवाओं की घटाओं से हुई बात है


बहारों ने भी बरसाए फूल 

चांद की चांदनी से हुई बात है

भर रहा है रंग मुझ में

 मेरी मीत से हुई बात है


 रतनारे नैनों को पढ़कर

 हरसिंगार के फूलों से अभिषिक्त कर

सुमन सेज बिछ गई धरा पर

प्रियतम मुझ में रहो समाये

आत्मा मिलन की रात है।


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