Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Sheela Sharma

Inspirational


3  

Sheela Sharma

Inspirational


आईने की सीख

आईने की सीख

1 min 211 1 min 211

मन ही मन से बात करता

किससे कब क्या कैसे कहना

ढंग सिखाता

प्रत्युत्तर किसका क्या होगा

आगाज उसे हो जाता

विषम परिस्थितियों में 

डूबकर नैया पार लगाता

हर्षित मन फिर भी

मंथन करता सोचता 

साफ-सुथरी आज की जिंदगी भी क्या जिंदगी है 

बचपन का भोलापन मिट्टी का खेल 

अनुपम लगता 

कभी सफल, असफल कभी हताश हो जब मैंने अपना अक्स आईने में देखा 


जीवन शैली ताले की चाबी बना ली

जैसी भी जगह मिले 

उसी अनुरूप बन तरल नदी 

दिल से दिल की बात समझ जाए

उसे अपना ले जल्दी 

रिश्तों से रास्ते रास्तों से रिश्ते बन जाते

अपने ही सत्कर्मों से बेसमय मिल जाते फरिश्ते 


संघर्षों से जीत में तनहाई की टीस में 

ना बेवजह कहना 

बदहवासी में बेखयाली का न सुनना ना गुनना 

जीवन एक किताब हर दिन मिलता ज्ञान हर पल होती परीक्षा प्रश्नों से अंजान आत्मविश्वास रख प्रतिपल 

जितना मिल जाए ज्ञान 

बिना बात उलझो नहीं 

धर मौन राहें बने आसान 

सादगी में ही सच्चा सुख है भाई 

अक्स की यही सीख समझ में आई


Rate this content
Log in

More hindi poem from Sheela Sharma

Similar hindi poem from Inspirational