मुख पर सूरज सा तेज़
मुख पर सूरज सा तेज़
मुख पर सूरज सा तेज और फौलाद है इनके इरादों में,
तन मन से देश की सेवा करते,मजबूत है अपने वादों में,
न धूप की तपन इन्हें जलाती न बारिश की मार डिगाती,
छोड़कर घर बार मातृभूमि की सेवा में खड़े हैं सरहदों में,
आफ़ताब सी चमक इनकी, देख दुश्मन भी घबरा जाए,
इनके फौलादी इरादों को देख पत्थर भी चूर चूर हो जाए,
देश की आन बान शान ही इनकी दौलत इन्हें चाहिए बस,
मातृभूमि के लिए लड़ते लड़ते इसी मिट्टी शहीद हो जाएं,
भारत माता ने मुश्किलों में जब भी इन सपूतों को पुकारा,
अनसुनी कर अपनी मां की पुकार अपना जीवन दे डाला,
ये सच्चे सपूत, मातृभूमि के लिए कर देते खुद को कुर्बान,
मातृभूमि की सेवा हेतु छोड़ आते हैं, अपना संसार सारा।
