मन के दीप
मन के दीप
मन के दीप जलाए रखना।
आशाओं को मन में बसाए रखना।
हार भी हो जाए तो रुकना नहीं।
फिर से खुद को उठाए रखना।
मन में आशाओं के दीप जले हो
तो दुख का अंधेरा छंट जाता है
बड़ी-बड़ी मुसीबतों से भी यूं ही पार उतर जाता है।
मन के दीप अगर जलते हों
तो दुख का अंधेरा कहां टिक पाता है।
मन से मन का प्रत्येक प्राणी का नाता है।
मन में सबके बैठा विधाता है।
आस तू अपनी बनाए रखना।
मन के दीप जलाए रखना।
मन में आशाओं को रोशन कर
नकारात्मकता दूर भगाएं रखना।
प्राणी मात्र को तुम सुख देकर
खुद को भी सुखी बनाए रखना।
