!!वजह आज भी है रणभूमी!!
!!वजह आज भी है रणभूमी!!
जीने की आस तो उन्हे भी थी
पर जी ना सके
चाहते थे वो खत लिखना
वो भी ना लिख सके
क्योंकि सांसे उनकी फूल रही थी
सीने में गोली जो लगी थी
दर्द से वो तडप रहे थे
मुठ्ठी और मुँह बंद कर
अपने अंदर ही अंदर
बिना कोई आवाज किए सब सह रहे थे
ना चीख की
ना आक्रोश की कोई गुंजाईश थी
आक्रोश करते भी तो कैसे
सामने दुश्मन की टोली जो खडी थी
कई शहीद वीरो के हम है गवाही
पूछते रहे ईश्वर से क्यूँ तुने ऐसी लीला रचाई
क्या क्या सुनाए हाल
हाल बडा बेहाल था
चारों तरफ सन्नाटा था
मौत का बुलावा था
फिर भी हम अडे रहे
जमकर डटे रहे
दुश्मन को धूल जो चटानी थी
भारत के वीरो की ताकद उनको दिखलानी थी
मेरे वीरो को दी वो चोट
दुश्मन को भी तो देनी थी
कैसे बताऊँ आँखो देखी जुबानी
युद्ध के दिनो की कहानी
देता हूँ में वीरो को सलामी
वजह उनकी जिंदा है आज भी यह रणभूमी !!
