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Shubhangi Dupte

Inspirational

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Shubhangi Dupte

Inspirational

खाकी हूँ मैं

खाकी हूँ मैं

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खाकी हूँ मैं

तमाम देशबांधवों की रक्षक हूँ मैं

दिन हो या रात हर पल सजग हूँ मैं;

खाकी हूँ मैं

ना इसकी ना उसकी ना किसी की खाजगी हूँ मैं

सिर्फ मेरे देश और देशवासियों की हूँ मैं;

खाकी हूँ मैं

मुझको ना भूक ना प्यास है

वतन की रक्षा का ध्यास है;

खाकी हूँ मैं

इस वतन की दुजी माटी हूँ मैं

शिष्टाचार भ्रष्टाचार की लाटी हूँ मैं

खाकी हूँ मैं

होली हो दिवाली हो या दहशतवादों की हो टोली

खेल लेती हूँ मैं रंगो की होली तो कभी झेल लेती हूँ खून की गोली ;

खाकी हूँ मैं

बडी ही नसीबवाली हूँ मैं

तिरंगे से लिपटी सिसकती छाती हूँ मैं;

खाकी हूँ मैं

वतन की दुजी माटी हूँ मैं। 


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