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Madhu Gupta "अपराजिता"

Inspirational

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Madhu Gupta "अपराजिता"

Inspirational

माँ ब्रह्मचारिणी

माँ ब्रह्मचारिणी

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दूसरा रूप है माँ ब्रह्मचारिणी का। 

करो प्रणाम सब हृदय से उनको।। 

ब्रह्मचारिणी अथवा तप की चरणी। 

मां का यह रूप बड़ा निराला है।।


जन्म हुआ हिमालय के घर। 

पुत्री उनकी प्यारी कहलाई थी।। 

शंकर संग जायेगी ब्याही नारद ने ये कहा था। 

और कठिन तपस्या से तुम शंकर को पाओगी।। 


कठिन तपस्या के कारण ही माँ। 

कहलाई तपस्चारिणी और ब्राह्मचारिणी।। 

एक हज़ार साल तक की कठिन तपस्या। 

खाये फल और फूल किया जीवन व्यतीत।। 


सौ वर्षों तक शाक खाकर माँ ने। 

किया नियहि अपना जीवन।। 

कई वर्षों तक कठिन उपवास। 

और धूप कड़ी ठंड में किया व्यतीत।।


फिर खाए जमीन पर पड़े बेलपत्र। 

और करती रही शिव आराधना।। 

फिर कई वर्षों तक भूखी प्यासी। 

माँ करती रही घोर तपस्या।। 


कई साल कुछ ना खाने पर। 

पड़ा अपर्णा नाम था उनका।। 

मां उनकी देख हुई बहुत आहत थी।

नाम पड़ा तब उनका उमा ब्रह्मचारिणी।। 


हाहाकार मचा तीनों लोकों में। 

देख उनके कठिन तपस्या को।। 

सारे ऋषि मुनि  सिद्धि गढ़ देवी देवता। 

गाने लगे उनकी तपस्या का गुणगान।। 


तब हुई भविष्यवाणी ब्रह्मा जी की। 

 मिलेंगे तुमको चंद्रमौली शिवाजी।। 

देता तुमको मैं यह आशीष हूं । 

होगी मुराद पूरी तुम्हारी देता वचन में आज हूं।।



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