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Vaibhav Rashmi Verma

Romance

4  

Vaibhav Rashmi Verma

Romance

देखा न कभी

देखा न कभी

1 min
262


मेरी मोहब्बत को तुम कागज़ो में ढूँढते रहे,

नज़रें उठा के देखा न कभी।


चाहत रही साथ मेरे चलने की तुम्हें,

पर हाथों को बढ़ाया न कभी।।


अब और वज़ह क्या बताये दूरियों की,

हमने तो पास तुम्हे पाया न कभी।


मेरी मोहब्बत को तुम कागज़ों में ढूँढते रहे,

नज़रें उठा के देखा न कभी।


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