STORYMIRROR

Indraj Aamath

Drama

3  

Indraj Aamath

Drama

प्यार की भाषा

प्यार की भाषा

1 min
468

शिशु की छुवन से हर माँ का

रोम रोम प्रफुल्लित हो जाता है,

बेटे के पथ पर बढ़ते कदमों से

हर पिता गर्व से इठलाता है।


आंगन से निकली हर डोली

घर सुना सुना कर जाती है,

सावन की बारिश में देखो

विरह दर्द उमड़ ही जाता है।


नगर की सख्त दीवारों को

प्यार खंड खंड कर जाता है,

मन की हर उलझन में भी

ये मरहम भी लगा जाता है।


नफ़रत की सीमा पर देखो

बेगुनाह रोज सो जाते है,

झूठे ऑनर कि खातिर

प्यार बलि चढ़ जाता है ।


प्यार की भाषा जो समझा

वो मदमस्त हो जाता है,

दूर दराज से पथिक भी

घर को लौट चला आता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama