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Lakshman Jha

Romance


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Lakshman Jha

Romance


" प्यार की अनुभूति "

" प्यार की अनुभूति "

1 min 311 1 min 311


तुम अपने होंठों से कोई गीत सुनाओ ,नयनों की भाषा से मेरा दिल बहलाओ !

अंगों की मादकता से अमृत रस बरसे ,मन के आँगन में कोई फूल खिलाओ !!

तेरी भीगी भीगी खुसबू ,को अपने ही पास रखूँ !तेरी साँसों की रफ़तारों ,

के संग मैं चलता रहूँ !!रातों की तनहाई में कुछ बात बताओ , 

प्यार भरा जीवन का कोई राग सुनाओ !अंगों की मादकता से अमृत रस बरसे ,

मन के आँगन में कोई फूल खिलाओ !!तेरी जुल्फों के साये में , 

मेरी अब रात कटेगी !जन्मों की प्यासी रूहों ,की अब प्यास बुझेगी !!

इस मिलन के क्षण को अमर बनाओ ,जीवन के सुखसागर का आनंद उठाओ !

अंगों की मादकता से अमृत रस बरसे ,मन के आँगन में कोई फूल खिलाओ !!

हम दूर रहे तुम दूर रहे ,और नहीं रह सकते हैं !

जीवन तो है साथ मधुर ,जब संग सदा ही रहते हैं !!

नये गीत सुर का कोई गीत बनाओ , मेरे कानों में अमृत धारा बन जाओ !

अंगों की मादकता से अमृत रस बरसे ,तुम अपने होंठों से कोई गीत सुनाओ !!

नयनों की भाषा से मेरा दिल बहलाओ ,अंगों की मादकता से अमृत रस बरसे !

मन के आँगन में कोई फूल खिलाओ ,मन के आँगन में कोई फूल खिलाओ !!


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