पुष्प कली
पुष्प कली
धधक रही है मेरे मन में ,
एक शुद्ध प्रेम की ज्वाला,
पुष्प कली सी खिल उठी है,
एक प्यार की बगिया दिल में,।
सुवासित हो उठा मेरा तनमन,
पाने को एक सुंदर सी बाला,
भौरा बन भिन भिना रहा मैं,
देख उन्मादित कलियों को, ।
गुलाब सी खिली वो कलियां ,
हैं कांटे भी उनके दामन में,
आसान नहीं उनका रस पाना,
जो कोई बन जाए दीवाना ..।

