पुरानी इमारत
पुरानी इमारत
गुजरे हुए जमाने को मन फिर याद करने लगा।
वर्तमान में भूतकाल को तकने लगा।
पुरानी यह इमारत हो गई है रह रह कर इसे तकने लगा।
पापा का गुस्सा और दादी का प्यार।
रामायण और महाभारत सीरियल का इंतजार।
वह प्यारा सा झगड़ा वह प्यारा सा प्यार।
समय तब बहुत था।
इसी इमारत के सामने सड़क थी कच्ची और एक बहुत बड़ा पेड़ था।
सब घर थे अपने, सभी पर अपना जोर था।
ना कोई अंकल ना कोई आंटी,
दादा दादी चाचा चाची या थे मौसा मौसी।
बुआ और जीजी का घर आना भी लगता त्योहार था।
बहुत से रिश्तों की थी तब भरमार।
मनोरंजन के लिए तब टीवी लगता था चौंक में बाहर।
अब ना आएंगे वह गुजरे जमाने
अब ना मिलेंगे वह लोग पुराने।
पुरानी इमारत बची है वह बेचने आया हूं।
रिश्ता पुरातन से अब तोड़ने आया हूं।
वह पुरानी यादें भी अब भुलाने आया हूं
कोई नहीं सुनने वाला बस अकेला मैं ही हूं यहां।
यादों में जो जिया है जीवन वह सच में कहां?
मैं बैठा यहां हूं अब वह जमाने कहां ?
