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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance Tragedy Thriller

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance Tragedy Thriller

पतझड़

पतझड़

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प्यार की बसंत खीली हुई थी,

अचानक क्युं नाराज हो गई? 

मुझको छोड़कर चली गई तूं,

जीवन मेरा पतझड़ बना गयी। 


प्यार की बसंतमें डूबाकर तुने,

मुझको क्युं अकला छोड़ गई? 

ख्वाबों का महल तोड़कर तूं,

जीवन मेरा पतझड़ बना गई।


प्यार दिल से किया था तुझसे, 

क्युं मुजे तूं फरेबमें फंसा गई? 

अश्को की माला पहेनाकर तूं, 

जीवन मेरा पतझड़ बना गई? 


तेरी तस्वीर बसाई थी दिल में, 

क्युं दिल से तस्वीर मिटा गई? 

नफ़रत मेरे दिलमे जलाकर तूं, 

जीवन मेरा पतझड़ बना गई।


लिख रहा था में गज़ल तेरी, 

क्युं तूं गज़ल अधूरी कर गई? 

"मुरली" घर दूसरे का बसाकर तूं, 

जीवन मेरा पतझड़ बना गई।


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