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Renuka Chugh Middha

Romance

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Renuka Chugh Middha

Romance

पश्मीना से ख्वाब

पश्मीना से ख्वाब

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सर्द रातों की देह पर उगते है , 

पश्मीना से गर्म अहसास 

हवा धकेल के ... दरवाज़ा 

आ जाती है घर में, 

कभी तुम भी ..... 

यूँ ही आया -जाया करो."

कभी पिघलते ....कभी जलते , 

कभी खामोश ही रहते है..... 

ये दहकते हुऐ ... अलाव , 

बुझा देते तो ... अच्छा था ,

सर्दियों की रात में ,

वही तेरा सिंदूरी एहसास .... 

हल्का सा कुहासा ओढ़े , 

लिपट रही है तेरी याद , 

जिस्म से मेरे ... लिहाफ़ की तरह !! 



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