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Reena Devi

Tragedy

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Reena Devi

Tragedy

परिवर्तन

परिवर्तन

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समय की मांग परिवर्तन है

पर रास मुझे न आया

पहले वाला प्यार प्रेम ही

हृदय बीच समाया।


धन्य भाग मेरे जो मैंने

जनम यहाँ पर पाया

समय की मांग परिवर्तन है

पर रास मुझे न आया।


नहीं चाह समानता की

मैं अबला ही कहली लूंगी

देवी जैसा मान मिले तो

ओट चिक की सह लूंगी।


अतिथि देवो भवः का नारा

हमने ही तो अपनाया

समय की मांग परिवर्तन है

पर रास मुझे न आया।


आधुनिकता ने हावी होकर

विचार परिवर्तन करा दिये

नन्हें नन्हें बच्चों में देखो

अश्लीलता के भाव जगा दिये।


फूल सी बच्चियां सुरक्षित नहीं

जाने कैसा ये बदलाव आया

समय की मांग परिवर्तन है

पर रास मुझे न आया।


कूट कूच कर भाव भरा था

हर बच्चे में देशभक्ति का

ढूंढत अखियां हार गई

भाव मिला आपाधापी का।


पशु पक्षी सर्वजन्तुओं पर

प्रेमसुधा जो बहती थी

नहीं दिखाई देती अब

भाईचारा शक्ति होती थी।


परिवर्तित हो गयी बैरभाव में

क्या यही विकास हमने पाया

समय की मांग परिवर्तन है

पर रास मुझे न आया।


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