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Dipti Agarwal

Romance

3  

Dipti Agarwal

Romance

परिजनर ऑफ सॉल

परिजनर ऑफ सॉल

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भीनी भीनी-सी,

बारिश की छीटें,

हवा के थपेड़े,

कोहरे को चीरते

खाली-सा वीरान सन्नाटा,

सिसकती पत्तियों की 

तड़प को भेदता।


घुटन-घुटन,

रक्स-रक्स,

शोर-शोर,

अक्स-अक्स,

आग-पानी,

मिटटी की कहानी,


लाल नीर,

साये रूहानी,

क़ैद रूह,

बेड़ियाँ–बेड़ियाँ,

दूर कहीं,

जन्नत का कुआं।


इंतज़ार- इंतज़ार,

पलकें अश्रु,

सूनी हथेली,

रूखे से अधर।


पुकारते -पुकारते,

दिन- दिन, पल- पल,

खलिश तपिश,

हलचल- हलचल।


मुरझाया-सा फूल,

टूटता बिखरता,

पुर्ज़ा- पुर्ज़ा,

ज़र्रा –ज़र्रा।


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