परिजनर ऑफ सॉल
परिजनर ऑफ सॉल
भीनी भीनी-सी,
बारिश की छीटें,
हवा के थपेड़े,
कोहरे को चीरते
खाली-सा वीरान सन्नाटा,
सिसकती पत्तियों की
तड़प को भेदता।
घुटन-घुटन,
रक्स-रक्स,
शोर-शोर,
अक्स-अक्स,
आग-पानी,
मिटटी की कहानी,
लाल नीर,
साये रूहानी,
क़ैद रूह,
बेड़ियाँ–बेड़ियाँ,
दूर कहीं,
जन्नत का कुआं।
इंतज़ार- इंतज़ार,
पलकें अश्रु,
सूनी हथेली,
रूखे से अधर।
पुकारते -पुकारते,
दिन- दिन, पल- पल,
खलिश तपिश,
हलचल- हलचल।
मुरझाया-सा फूल,
टूटता बिखरता,
पुर्ज़ा- पुर्ज़ा,
ज़र्रा –ज़र्रा।

