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Rachna Vinod

Romance

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Rachna Vinod

Romance

प्रेमिल चाहत

प्रेमिल चाहत

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नादानी की सोच नादान

दिल बेचैन दिमाग़ परेशान

किसी को कोई कैसे बताए

जब अपने हाल पर ख़ुद हैरान

कोमल तन कोमल मन

कोमल सब मनोभाव 

कभी आहत होते हुए 

फ़िर भी प्रेमिल चाहत में 

डूबते-उभरते हुए 

भावनाओं की अनजान राहों में

अजनबी सफ़र की पहचानो में 

एहसासों की पाक़ीज़गी में

नरम, नाज़ुक खयाली में 

हसीं तसव्वुर के मनचाहे मंज़र में 

रहने, पनपते, खिलते हुए 

ज़िन्दगी की बरकत में

राज़दार बनी हसरत में 

सजग सतर्क शोख प्यार से परिपूर्ण 

सुकुमार मृदु भावनाओं को 

किसी को कोई क्यों बताए!

  


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