STORYMIRROR

Smita Singh

Romance

4  

Smita Singh

Romance

बरसात

बरसात

1 min
378


दूर तक आखों मे बादलो का साया है ,

आज मुझे तेरे ख्यालो की, बरसात ने भिगाया है।


पैर फिसल से रहे है यादो की मिट्टी से,

खुशबु बिखर सी गयी है,भीगी हुई चिट्ठी से।


दिल की मिल्कियत मे आज नमी सी है,

इस इंद्रधनुष सी जिंदगी मे,अहसासो की कमी है।


सावन तेरी यादो का ,भिगाये बिना नहीं जाता 

उफ्फ,तेरी बेरुखी सा बरसना ऐ हमनवा

,सावन की बरसात को भी नहीं आता।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance