STORYMIRROR

Vivek Madhukar

Abstract Romance Inspirational

4  

Vivek Madhukar

Abstract Romance Inspirational

प्रेम और आसक्ति

प्रेम और आसक्ति

1 min
99

प्रेम वह पवित्र सरोवर है

जिसके जल में नहाकर

मन का मैल धुल जाता है

सारी गन्दगी बह जाती है

उसके बहाव से


इसलिए

किसी को चाहना बुरा नहीं

किसी के प्यार में

डूबना बुरा नहीं


बुरी तो है आसक्ति

मन की नहीं, तन की

जन की नहीं, धन की

आसक्ति छोड़ो, प्रेम करो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract