STORYMIRROR

Usha Raghav

Romance

4  

Usha Raghav

Romance

हमारे दरमियाँ

हमारे दरमियाँ

1 min
406

हमारे दरमियाँ ये जो फ़ासले हैं

आओ कर दें ख़त्म इन फ़ासले को


कभी तुम नज़रंदाज़ कर देना

तो कभी हम अनदेखा कर देंगें


कभी जो रूठे तुम तो हम मना लेंगे

नाराज हम अगर हों तो तुम मना लेना


न तुम कभी दूर जाना न हम दूर जाएंगे

अपने अपने हिस्से का प्यार हम निभाएंगे।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance