STORYMIRROR

Akanksha Gupta (Vedantika)

Abstract Romance

3  

Akanksha Gupta (Vedantika)

Abstract Romance

प्रेम फिर से

प्रेम फिर से

1 min
190

उम्र बीत गई कि फिर से प्यार हुआ

एक नई ज़िंदगी का हमकों एहसास हुआ

बीत चुकी उम्र हमारी तो हर्ज क्या है


जमाने की नजरों में अब प्यार क्यों एक गुनाह है

क्या जिम्मेदारी के साथ खत्म हो जाती इच्छा भी

किसी के प्रेम भरी नजर क्यों एक चुभन बन जाती

इस उम्र का प्रेम तो बंधा होता हैं एक विश्वास से


जो बन जाता हैं एक सहारा इस तन्हाई में

वृद्धावस्था का प्रेम होता हैं मित्र हमारा

जो जीवन की सांझ में रहता है हमारे साथ

बांटता है मन के विचारों को मेरे साथ


आखिर क्यों एक अपराध है यह

वृद्धावस्था का प्रेम।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract