प्रेम ही प्रेम
प्रेम ही प्रेम
प्रेम की अमिट शक्ति जगाती,
मन की दुनिया को सजाती।
सौंधी सोंधी खुशबू फैलाती,
खुद को ही प्रेम में खो देती,
अपना सर्वस्व लुटा देती ।
प्रेम से जीवन उजियाला,
दर्द भरे अंधकार भगाता ,
अनमोल रिश्तों को पल में बनाता ।
प्रेम संगीत है, सुरों की धुन है,
दिल के तारों का सगंम है,
प्रेम ही प्रेम को पूजता है,
दूसरों को स्वयं से ऊँचा रखता है।
विश्वास और सम्मान की बाँध बनाता है,
हर रिश्ते को स्नेह से जड़ देता है।
प्रेम अनमोल तोहफा है धरती का,
जो हमेशा बना रहे सच्चा।
चाहे जीवन की कितनी बाधाएं आएं,
प्रेम की शक्ति सबको जीना सिखाये
यह प्रेम ही है जो प्रेम में पड़े
वही इसकी मिठास पा सके ।
