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Shashi Aswal

Drama

4  

Shashi Aswal

Drama

प्रैक्टिकल लड़की

प्रैक्टिकल लड़की

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कितना मुश्किल होता है 

न अकेले चलते रहना 

अगर कोई साथ हो तो 

हर राह आसान हो जाती है 

ऐसा मैंने कहते हुए सुना है 


संगठन में बल है 

ऐसा हम सदियों 

से पढ़ते आ रहे है 

किस्सों, कहानियों में 

लोगों की जुबाँ से 


पर मेरी जैसी 

प्रैक्टिकल लड़की 

जो बातों से ज्यादा 

देखने या करने में 

विश्वास रखती है 

उसके लिए बहुत 

कठिन है ये बात समझना 


और ये बात 

मेरे तब समझ 

में आई जब 

मेरी जीजी को 

पढ़ने जाना था 

बाहर गाँव से आगे 

शहर पढ़ाई के लिए 


जीजी ने बात करी माँ से 

और माँ ने बापू से 

पर बापू कहने लगे 

मुझे कुछ नहीं पता 

पिताजी से बात करो 


दादा जी ने साफ मना 

कर दिया कहीं जाने से 

ये कहकर कि लड़कियाँ 

गाँव से बाहर नहीं जा सकती 

जो पढ़ना है यहीं गाँव में पढ़े 


पर हमारी जीजी 

भी ठहरी जिद्दी 

क्योंकि 12वीं के बाद 

गाँव में कॉलेज नहीं था 

इसलिए माँ को 

उसने समझाया 

माँ पहले से ही 

समझदार थी 

तो ज्यादा परेशानी 

नहीं हुई समझाने में 


आखिर मैं माँ ने भी 

फैसला कर लिया 

या तो जीजी पढ़ने 

शहर जाएगी 

या माँ इस घर में रहेंगी 


दादा जी को बता दिया 

सब कुछ जो भी था 

माँ ने समझाया दादा जी को 

कि अगर आपको 

भरोसा नहीं तो मैं साथ 

चली जाऊँगी उसके साथ 

पर मेरी बेटी आगे जरूर पढ़ेगी 


जीजी भी माँ के साथ 

खड़ी हो गई मजबूती से 

और मैंने भी अपने हाथ 

को माँ के हाथ से मिला दिया 


हमारे दृढ़ निश्चय को देख 

कर दादा जी ने हामी भर दी 

और सबके चेहरों में 

लौट आई एक हल्की सी मुस्कान 


और तब मैं मतलब समझी 

एकता में बल है का मतलब 

एक और एक ग्यारह का अर्थ 

संगठन में बल है का बल 


आखिरकार इस तरह 

मेरी जीजी कॉलेज जा पाई 

और मैं भी आज 

कॉलेज ही जा रही हूँ।


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