STORYMIRROR

Kavita Sharrma

Tragedy

4  

Kavita Sharrma

Tragedy

प्राणी

प्राणी

1 min
254

धरती पर सब प्राणियों को रहने का है अधिकार

पर मनुष्य ने स्वार्थ से किये सारे काम

पशुओं का घर छीनकर किया उन्हें बेघर

मनुष्यता भूलकर बन बैठा बर्बर

पर पशु अपने गुणों को नहीं छोड़ते कभी भी

फिर मनुष्य की अमानवीयता की

तुलना क्यों होती पशुओं से

ऐसा करके हमने अपना ही अपमान कराया

पशुओं ने तो हमेशा अपना व्यवहार अपनाया।


ഈ കണ്ടെൻറ്റിനെ റേറ്റ് ചെയ്യുക
ലോഗിൻ

Similar hindi poem from Tragedy