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Anita Sharma

Romance Classics Inspirational

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Anita Sharma

Romance Classics Inspirational

पिता

पिता

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पिता वो जो खुद से पहले बच्चों के बारे में सोचते है। 

खुद के कपड़े पुराने पर बच्चों के हमेशा नये होते है। 


खुद पुरानी साइकिल चलाते पर बच्चों को बाइक दिलाते है। 

करते तो है बहुत प्यार वो पर बच्चों पर सख्ती दिखाते है। 


गलतराह जो पकड़े बच्चा कान पकड़कर वापिस लाते है। 

बिदा करें जो बेटी को तो छुप- छुप कर आंसू बहाते है।


माँ की हर इच्छा पूरी कर परिवार को 

खुशहाल बनाते है। 

जो आये मुसीबत घर पर तो

चट्टान बनकर सामने खड़े हो जाते है। 

देखकर खुश सभीको ये मन ही मन में मुस्काते है।


आकाश से बड़ा है उनका कद 

ये हर मुसीबत के बाद साबित कर जाते है। 


हो कितनी भी तपती जिन्दगी

पर बच्चे को हर आंच से बचाते है। 

बच्चे का साया बनकर जो

हमेशा साथ निभाते है। 

वो पिता ही है जो पथरीली राह पर बच्चों को चला। 


उन्हे रास्ता सुगम बनाना सिखाते है। 

अच्छे कर्मों का उदाहरण दे, 

वो बच्चों को फूलों सा मेहकना सिखाते है। 

है वंदन पिता के चरणों में

जो अपने जीवन की हर खुशी 

अपने परिवार के नाम कर देते है। 


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