STORYMIRROR

अर्चना तिवारी

Classics

4  

अर्चना तिवारी

Classics

पिता

पिता

1 min
270

पिता वो भगवान होते हैं 

जो बिन माँगे हर मुराद पूरी करते हैं 

हर दर्द का इलाज़ और दवा

हमारे लिए नित दुआ भी करते हैं 


स्वयं हर कष्ट सहते हैं 

पर मुँह से कुछ न कहते हैं 

बच्चों की झिलमिल आँखों के 

हर सपनों को भी पढ़ लेते हैं 

पिता बच्चे का वो गुल्लक है 


जो कभी खाली नहीं होता 

पिता हर बच्चे का संबल 

शक्ति और जीवनदाता होते हैं

पिता वह वट वृक्ष है 


जो सबको बांधे रहता है 

 माँ से प्यार ,दुलार और स्नेह  

ममता और जीवन मिलता है 

तो पिता से जीवन जीने का 

नाम संग दृढ़ आधार मिलता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics