फूल खिला था..!
फूल खिला था..!
दिल के बागीचे में एक फूल
जो खिला था।
क्यूं कि वो जो मिला था
महक उठा मेरा ये सारा जहां था।
क्यूंकि जिंदगी को नया रंग जो मिला था
भौरों ने भी शोर बहोत मचाया था।
क्योंकि जिंदगी में शहद जो घुला था
लेकिन लेकिन
था तो वो महज एक फूल ही
शाम ढलते ही मुरझा गया
बिलकुल मेरी तरहा।
क्यूं कि वो जा चुका था और
जिंदगी में अंधेरा छा जो चुका था।
