STORYMIRROR

Abha Chauhan

Tragedy

4  

Abha Chauhan

Tragedy

फुटपाथ की जिंदगी

फुटपाथ की जिंदगी

1 min
277

अपनी उधड़ी हुई जिंदगी को रोज सीते हैं,

कुछ लोग फुटपाथ पर भी जिंदगी जीते हैं।


आते जाते हुए लोग भला बुरा कहते हैं,

हर रोज वो लोगों की अवहेलना सहते हैं।


कभी चौराहे पर खड़ी गाड़ी को साफ करते हैं,

धुतकारे जाते हैं जब आगे हाथ करते हैं।


दो जून की रोटी के लिए इधर-उधर भटकते हैं,

पता नही ये लोग सबकी नजर में क्यों खटकते हैं।


ठंडी ,गर्मी, बरसात यही अपनी रातें गुजारते हैं,

कभी-कभी अमीरों की गाड़ी से कुचले जाते हैं।


जीवन जीने के लिए कितना कुछ सहते हैं,

जी हां, कुछ लोग फुटपाथ पर भी रहते हैं।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy