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GUDDU MUNERI "Sikandrabadi"

Romance

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GUDDU MUNERI "Sikandrabadi"

Romance

पहला वेलेंटाईन

पहला वेलेंटाईन

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नींद से जागा तो 

आंखें खुली सवेरा पाया 

ना जाने कौन सी कमी थी 

खुद को मैने तन्हा पाया 


कदम बड़ चले थे 

किसी की तलाश में 

किसी ने मुझको चाहा 

और किसी ने भगाया 


कुछ दिन बीत गए 

गली-मोहल्लो में रौनक आई 

इस गली उस गली 

जहाँ जहाँ जाऊँ 

सिर्फ गुलाब ही गुलाब पाऊँ 


राह चलते एक राही आया 

प्रेम संग प्रेमिका को लाया 

एक गुलाब देकर कहता है 

ये दिल तेरे दिल में रहता है 


मैं ये देखकर जान गया 

प्यार क्या है ये मान गया 

पर मैं फ़िर भी उदास

नही कोई देता मेरा साथ 


उठाकर गुलाब मैं चल पड़ा था

किसी अंजान चेहरे की तलाश में 

एक प्यार और विश्वास पाना था 

महबूब बनाकर एक रिश्ता बनाना था 


शाम ढलती जाती 

बैचैनी बढ़ती जाती थी 

इससे पहले मैं थककर हार जाता 

पीछे से एक आवाज आई 

एक सांवली सी लड़की 

मेरी जिन्दगी में आई 


मेरी पहचान बनकर 

मुहब्बत की शुरुआत 

और मेरे प्यार की 

निशानी बनकर 


ये दिन मेरे लिये खास बन गया 

जैसे मेरा वेलेंटाईन बन गया 

प्यार मिला दिल मिला 

मुहब्बत मिल गई 

जीवन को एक नई 

शुरुआत मिल गई।


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