STORYMIRROR

अजय '' बनारसी ''

Tragedy

4  

अजय '' बनारसी ''

Tragedy

पहला कदम

पहला कदम

1 min
364

जब अपना

पहला कदम

बढ़ाया था बेटी ने

निश्चिंत थी और

मुस्कराते हुये

चहचाहते लड़खड़ाते

चलना सीखा था ,

बाँहों में झूलकर

विश्वास था

उस छोटी सी

बच्ची को

अपने पिता पर

कि वह उसे नीचे गिरने

कभी नहीं देंगे

काश !!!!

यही विश्वास

उस बेटी ने

एक बार

फ़िर दिखाया होता

अपने पिता पर

अपनी ज़िन्दगी के

बड़े फैसले पर

बढ़ाने से पहले

पहला कदम !



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from अजय '' बनारसी ''

Similar hindi poem from Tragedy