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Ritu Sama

Tragedy


4.6  

Ritu Sama

Tragedy


Phir se wahi

Phir se wahi

1 min 288 1 min 288



फ़िर सहमी हुई सी है उसकी फितरत

फिर रह रह झुक जाती हैं पलकें

फिर अनजान रास्तों का खौफ़ है उसे

फिर कभी बेड़ियों में पाया है खुद को उसने।


फिर राह पे चलते हुई ठिठक के पलटी

फिर राह पे कांटे बिछे उसकी

फिर नाहक ही उसे अपने होने को सजा मिली

फिर हौले से उसने टपकाए आंसू।


फिर चाहत हुई फिर से धरा खा जाए उसे

फिर से इस दुनिया की नीयत ने दुत्कारा उसे

फिर सदियां बीती इन्हीं चक्रव्यू में,

फिर से बली चढ़ी बेवजह बेझिझक उसकी।


फिर से उसके जीवन के सफ़हे किसी और ने लिखे

फिर से उसकी सांसों की गिनती रोकी किसी ने

कहने को तो इंसान का दर्जा है उसे भी

पर फिर से इंसान सा सुलूक किया ना किसी ने।


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