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Ritu Sama

Tragedy

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Ritu Sama

Tragedy

Phir se wahi

Phir se wahi

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फ़िर सहमी हुई सी है उसकी फितरत

फिर रह रह झुक जाती हैं पलकें

फिर अनजान रास्तों का खौफ़ है उसे

फिर कभी बेड़ियों में पाया है खुद को उसने।


फिर राह पे चलते हुई ठिठक के पलटी

फिर राह पे कांटे बिछे उसकी

फिर नाहक ही उसे अपने होने को सजा मिली

फिर हौले से उसने टपकाए आंसू।


फिर चाहत हुई फिर से धरा खा जाए उसे

फिर से इस दुनिया की नीयत ने दुत्कारा उसे

फिर सदियां बीती इन्हीं चक्रव्यू में,

फिर से बली चढ़ी बेवजह बेझिझक उसकी।


फिर से उसके जीवन के सफ़हे किसी और ने लिखे

फिर से उसकी सांसों की गिनती रोकी किसी ने

कहने को तो इंसान का दर्जा है उसे भी

पर फिर से इंसान सा सुलूक किया ना किसी ने।


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