Chandramohan Kisku
Tragedy
मीलों दूर से
औरतों की सर पर
चढ़कर
घर को पहुंचा
एक बून्द पानी,
प्रणाम ,
औरतों की उस यात्रा को
प्रणाम,
औरतों की उस थकावट को
और अंत में प्रणाम ,
एक बून्द पानी को
जो अमृत बनकर
आया है मुझ तक !
समर्पण :कविता...
उसका भविष्य
मेरा भी प्रश्...
मलाला
तुम और मैं
लिखूंगी
प्यार का घर
आँसू की बूँद ...
चिड़ियाँ को मा...
आगे ही चलते र...
हर प्राणी बेचैन है, धरती हुई अधीर। इंद्रदेव कर के कृपा, बरसा दो कुछ नीर।। हर प्राणी बेचैन है, धरती हुई अधीर। इंद्रदेव कर के कृपा, बरसा दो कुछ नीर।।
तेरे लंबे बाल और गुलपोशी के चर्चे हर जगह थे खुबसूरती बेहद थी तुझमें पर पहरे हर जगह थे. तेरे लंबे बाल और गुलपोशी के चर्चे हर जगह थे खुबसूरती बेहद थी तुझमें पर पहरे ह...
अपनाते भले न हो मुझे पर मेरी बद्दुआओं से तो हैं डरते ! अपनाते भले न हो मुझे पर मेरी बद्दुआओं से तो हैं डरते !
यही फलन है जब नवपीढ़ी आँसू से सन जाती है सहिष्णुता जब हद से बढ़ती कायरता बन जाती है ... यही फलन है जब नवपीढ़ी आँसू से सन जाती है सहिष्णुता जब हद से बढ़ती कायरता बन जाती ह...
बस जन्म जहाँ परिचायक हो, फिर चाहे योग्य या नालायक हो। बस जन्म जहाँ परिचायक हो, फिर चाहे योग्य या नालायक हो।
#JusticeForPriyankaReddy पॉलिटिक्स का एक नया कारण बन गई, मेरी कहानी को निर्भया, अशिफ़ा के साथ जोड़ गय... #JusticeForPriyankaReddy पॉलिटिक्स का एक नया कारण बन गई, मेरी कहानी को निर्भया,...
संसद में हो या गलियों में, नारी का अपमान गलत है । संसद में हो या गलियों में, नारी का अपमान गलत है ।
क्या तुम अपने घर में मेरा अपना घर दे पाओगे। क्या तुम अपने घर में मेरा अपना घर दे पाओगे।
अपने घर का हाल देखकर,चुप रहना मत रोना अम्मा । अपने घर का हाल देखकर,चुप रहना मत रोना अम्मा ।
मन में कष्टों को बंधी किए, जीवन की एक उमंग हूं मैं, पुरुष हूं मैं। मन में कष्टों को बंधी किए, जीवन की एक उमंग हूं मैं, पुरुष हूं मैं।
कितने तो आँसू बहे होंगे इन आँखों से, घर ये खारे पानी का। कितने तो आँसू बहे होंगे इन आँखों से, घर ये खारे पानी का।
बड़ा खामोश लम्हा है इन चुप्पियों के दौरान भी। बड़ा खामोश लम्हा है इन चुप्पियों के दौरान भी।
घर घर जाके सबको हम सपना यही दिखाएंगे अच्छे दिन आएँगे, अच्छे दिन आएँगे। घर घर जाके सबको हम सपना यही दिखाएंगे अच्छे दिन आएँगे, अच्छे दिन आएँगे।
और कर रहे हैं शर्मिंदा सच को, झूठ के झुंड में। और कर रहे हैं शर्मिंदा सच को, झूठ के झुंड में।
छाती से चिपकाकर सुधियाँ पीड़ाओं ने लोरी गायी ! छाती से चिपकाकर सुधियाँ पीड़ाओं ने लोरी गायी !
तथा स्क्रीन पर आ गए भगत, सुभाष और अन्य वीर क्रांतिकारी। तथा स्क्रीन पर आ गए भगत, सुभाष और अन्य वीर क्रांतिकारी।
जीवन इतना सरल नहीं जीवन इतना सरल नहीं
कुछ भी करें आज़ाद है अब तो हम, अधिकार ही हैं,फर्ज़ कहाँ मानते हैं। कुछ भी करें आज़ाद है अब तो हम, अधिकार ही हैं,फर्ज़ कहाँ मानते हैं।
सड़क काली हो या भूरी जहां से भी निकलती है स्याह कर देती है। सड़क काली हो या भूरी जहां से भी निकलती है स्याह कर देती है।
औंधी पड़ी हुई धरती पर, निपट अभागिन छाँव। औंधी पड़ी हुई धरती पर, निपट अभागिन छाँव।