STORYMIRROR

मिली साहा

Abstract Inspirational

4  

मिली साहा

Abstract Inspirational

नश्वर

नश्वर

1 min
237

नश्वर है ये तन हमारा नश्वर यह संसार

ईश्वर ही शाश्वत सत्य बाकी सब बेकार

मोहमाया है धन दौलत रिश्ते नाते यहाँ

भ्रम है इंसान को यही सुख का आधार


नश्वर इस काया से मत कर इतना प्यार

प्राप्त कर परमात्मा को वही है आधार 

मिट्टी में मिल जाएगा क्षणभंगुर यह तन

फिर क्यों कोई इस पे करता नहीं विचार


जो कुछ है यहीं है कुछ नहीं उस पार

निष्काम कर्म कर थोड़ा कर परोपकार

बस यही सब साथ जाना है अंत समय 

क्योंकि तन नश्वर है नश्वर नहीं व्यवहार


हीरे मोती बड़े महलों का मोह है बेकार

केवल कर्म, व्यवहार याद रखता संसार

अमीर गरीब किरदार बस कुछ दिन का

फिर एक समान सबको जाना उस पार।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract