Dr Lalit Upadhyaya
Tragedy
कब दवा दारू बन गई,
मुझको पता नहीं।
दर्द ए दिल के बहाने पीता हूँ,
मेरी खता नहीं।
सात सटका चुका हूं,
मुझको सता नहीं।
नशा नाश करता है,
इसमें कोई नफा नहीं।
कल्याणी है ना...
प्रकृति का मं...
उत्तर प्रदेश ...
वोट है जरूरी
ऊंट किस करवट ...
खेला होवे ?
चलें प्रकृति ...
माँ का आशीर्व...
घर में बीते ब...
क्या कहूँ?
महलों कि नींदो में भी बेचैनी देखी झोंपड़ों में सोया कोई चैन से देखा महलों कि नींदो में भी बेचैनी देखी झोंपड़ों में सोया कोई चैन से देखा
गुहार बस्तियों को बचाने की लगाई थी हमने फिर भी छलकती निगाहों का निवाला बन गए गुहार बस्तियों को बचाने की लगाई थी हमने फिर भी छलकती निगाहों का निवाला बन गए
मुझे तुमसे मोहब्बत है ये कहने में सदियां बीत गई । मुझे तुमसे मोहब्बत है ये कहने में सदियां बीत गई ।
मुझे रुख़सत किया था ये कहकर वक़्त का कमाल देख लेना मुझे रुख़सत किया था ये कहकर वक़्त का कमाल देख लेना
गिर गिर कर उठना सीखा हमने बहुत गिर गिर कर उठना सीखा हमने बहुत
क्या लिखूँ में अपने बारे में मुझे कुछ समझ नहीं आता। क्या लिखूँ में अपने बारे में मुझे कुछ समझ नहीं आता।
कुछ लोग खा लेते हैं गम को कुछ लोग खा लेते हैं गम को
आप आराम से मुस्कुराते हैं, लेकिन मैं केवल आहें भर सकता हूं। आप आराम से मुस्कुराते हैं, लेकिन मैं केवल आहें भर सकता हूं।
हम ख्वाब भी बड़ा देख ले तो समझो इतने में ही जल जाते हैं हम ख्वाब भी बड़ा देख ले तो समझो इतने में ही जल जाते हैं
अब बात कहो सच्ची फिर भी लोगों को विश्वास नहीं होता अब बात कहो सच्ची फिर भी लोगों को विश्वास नहीं होता
आदर्शों की पोटली बांधे गयी बड़े शान से। आदर्शों की पोटली बांधे गयी बड़े शान से।
मत काटो इनके पंखों को माँ के कोख में ही, मत काटो इनके पंखों को माँ के कोख में ही,
उनके आने से उफ़, जाने से आह निकलती है उनके आने से उफ़, जाने से आह निकलती है
अपनी इच्छा से कहीं भी खर्च नहीं कर पाती अपनी इच्छा से कहीं भी खर्च नहीं कर पाती
धन, दौलत, ताकत, जितना निचोड़ना था, निचोड़ लिए, बस जान बाकी है. धन, दौलत, ताकत, जितना निचोड़ना था, निचोड़ लिए, बस जान बाकी है.
अभी तुमको तुमसा कोई इश्क़ करने वाला न मिलेगा। अभी तुमको तुमसा कोई इश्क़ करने वाला न मिलेगा।
क्या कहें ? कि अब तो, सारे लफ्ज़, धुंधले पड़ गए हैं! क्या कहें ? कि अब तो, सारे लफ्ज़, धुंधले पड़ गए हैं!
चुपचाप नजरें झुका कर, खड़े हैं उनके सामने हकीकतों को बनकर अब, जज़्बात रहने दो…. चुपचाप नजरें झुका कर, खड़े हैं उनके सामने हकीकतों को बनकर अब, जज़्बात रहने दो…...
चुभा कांटा सा दिल में, उनका ये अंदाज़ देखा तो। चुभा कांटा सा दिल में, उनका ये अंदाज़ देखा तो।