STORYMIRROR

Sudhir Kewaliya

Drama

3  

Sudhir Kewaliya

Drama

नकाबपोश

नकाबपोश

1 min
353

नकाबपोश नहीं हैं वो

लगाकर घूमते हैं


एक चेहरे पर 

कई चेहरे वो


अपनी दुनिया में 

दरिंदगी और हैवानियत से


नहीं घबराते हैं वो

बनकर कठपुतली 


किसी ओर के हाथों की

भूल जाते हैं 


चेहरा इंसानियत का वो

नहीं घबराते हैं देखकर 


चेहरा अपना

आईने में वो

नकाबपोश नहीं हैं वो..।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama