STORYMIRROR

सीमा शर्मा सृजिता

Romance

3  

सीमा शर्मा सृजिता

Romance

नजरबंद

नजरबंद

1 min
248

तस्वीर को क्या देखते हो 

दिल क्यों नहीं टटोलते हो 

हूं वही महसूस कर लो 

आंखें अपनी बंद कर लो 


रोम रोम में खुशबु मिलेगी 

चेहरे पर मुस्कान खिलेगी 

तुमसे कभी मैं नहीं जुदा 

जानती मैं और मेरा खुदा 


धड़कती हूं धड़कन बनकर 

अहसास -ए-दिल महसूस तो कर 

हर लम्हा याद आ जायेगा 

गुजरे जमाने में तुम्हें ले जायेगा 


मेरी बिखरी हुई जुल्फें 

चमकती आँखों का काजल 

मेरी मीठी सी मुस्कराहट 

जो करती थी तुम्हें घायल 


तुम्हारा हाथ थामकर 

तुमसे घंटों बतियाना 

ओढ़कर प्रीत को सिर पर 

प्रेम के गीत गुनगुनाना 


तुम्हारा इक नजर में ही

 मुझे दीवाना बनाना 

मुहब्बत से जुड़ा हुआ 

वो हर अफसाना 


तस्वीर छोड़ो तुम

बस आंखें बंद कर लो 

उम्र भर के लिए मुझे 

फिर नजरबंद कर लो।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance