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S N Sharma

Romance

4  

S N Sharma

Romance

नजर तुमने झुकाई।

नजर तुमने झुकाई।

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नजर तुमने झुकाई शाम ढलने लगी।

नज़र तुमने उठाई शमा जलने लगी।


शैतान मन ने तेरे लब को छुआ था।

हंसी होठों पे तेरे गीत सी सजने लगी।


मिटा कर भेद सारे दो रूठे दिलों के।

हवा इकरार की नई चलने लगी ।


चंद्रमा की चांदनी आकाश से उतरी।

धरा की धूल से आ गले मिलने लगी ।


उम्मीदें तमन्नायें लगीं बहती नदी सी।

नाव पतवार आशाओं की सजने लगी।


रात में मिल रहे दो दिल गले लग कर

तुम्हारी सांस मेरी सांस में घुलने लगी।



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