नज़र मिल जाने के बाद
नज़र मिल जाने के बाद
मै किसी से नज़र मिलाता नहीं हूं,
फिर भी उस से नज़र मिल जाती है,
उस से नज़र मील जाने के बाद,
मुझे मिलन के लिये तरसाती है।
मैं उसके लिये हर पल तड़पता हूं,
वो छूपकर मेरा हाल देखा करती है,
मेरी दर्द भरी पुकार सुनने के बाद,
अपना खूबसूरत चेहरा दिखाती है।
मैं उसका इस्तकबाल करता हूं,
वो दौड़कर बांहों में सिमट जाती है,
उसके बेशुमार हुस्न को देखने के बाद,
मुझे इश्क में मदहोश बना देती है।
मैं सितारों को इशारा करता हूं,
वो बाराती बनकर सब आ जाते है,
इश्क की महेफ़िल सजाकर "मुरली",
हम मधुर मिलन में खो जाते है।

