नजर में
नजर में
अब दुनिया कुछ और ही मेरी निगाहों में है।
जब से दीदार हुए हैं, मुर्शिद मेरे दिल में हैं।।
उनका ही जलवा है, जो हमारी नजर में है।
सब लगते हैं अपने, यह हकीकत जिगर में है।।
अब आंखों से पर्दा मजहबी नफरत का उठ गया।
हर मंदिर और हर मस्जिद, हमारी एक नजर में है।।
अब परेशान हूँ कि, सिज़दा किधर मैं करूँ।
जर्रे-जर्रे में भी, तुम्हारी ही सूरत नजर में है।।
हर किसी को बेगरज रूहानी दौलत लुटाई तुमने।
एक आपका ही नूर, हर किसी की नजर में है।।
तड़प रहा हूँ तुझे पाने की बेपनाह हसरत लिए।
बेवजह "नीरज, मत भटक, तेरा दिलदार तेरी नजर में है।।
