STORYMIRROR

Govind Narayan Sharma

Fantasy

4  

Govind Narayan Sharma

Fantasy

नजर का क़त्ल

नजर का क़त्ल

1 min
330

उल्फ़त में यूँ दिल बेक़रार न करा कीजिये,

नज़रों से किसी का कत्ल न करा कीजिये !


ग़र जिस्मानी मुलाक़ात मुमकिन नहीं तो ,

बेवक्त ख्वाबों में ही दरयाफ्त करा कीजिये !


वक़्त से हार कर यूँ हमदम उदास न बैठिये, 

वक़्त का वक़्त तक सामना करा कीजिये!


बेवजह खामोशी अच्छी लगती नहीं जनाब, 

कुछ नहीं तो हमसे शिकवा ही करा कीजिये !


जब भी कोई मुकम्मल फैसला करा कीजिये, 

दिल से भी जर कभी मशवरा करा कीजिये!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy