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Riya yogi

Abstract

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Riya yogi

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निः शब्द .......

निः शब्द .......

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कहने को मैं तेरी परछाई हूँ 

लेकिन ये रूप भी तो तुझी से पायी हूँ माँ 


मेरे जीवन की तू ही तो रचयिता है 

तुझसे ही तो मैंने हर बात को सीखा है 


तू ही मेरी गुरु मेरा गुमान है 

तुझसे ही मिली मुझे एक नयी पहचान है 


मेरे हर दर्द का इलाज है तू 

मेरे हर अरदास की अल्फाज है तू 


तू है तो रोशन है मेरा जहाँ माँ 

तेरे बिना नहीं तो सब अंधकार है


तेरे होठों की मुस्कान ही

मेरी हर कविता की पहचान है।


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