STORYMIRROR

Riya yogi

Abstract

4  

Riya yogi

Abstract

हमसफ़र ......

हमसफ़र ......

1 min
262

बिन कहे मेरी हर बात समझ लेते हो,

आँखों में छूपे हर जज्बात समझ लेते हो, 


चेहरे की रौनक देखकर ही तुम मेरी खुशियों की वजह

और गम के हर एहसास समझ लेते हो


न बताए जो मैंने कभी, कैसे हर राज समझ लेते हो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract